राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds)

राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds): भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक कदम

राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (National Mission on Edible Oils – Oilseeds, NMEO-Oilseeds) के बारे में जानना चाहते हैं, तो आप सही जगह पर हैं। यह भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य देश में खाद्य तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना और खाद्य तेलों के आयात पर निर्भरता कम करना है। यह योजना किसानों की आय बढ़ाने, टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने और भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चाहे आप एक छात्र हों, किसान हों या इस योजना के बारे में जानकारी चाहते हों, यह लेख आपको इसे आसान और समझने योग्य तरीके से समझाएगा। आइए, शुरू करते हैं!

राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds) क्या है?

राष्ट्रीय खाद्य तिलहन मिशन (NMEO-Oilseeds) एक ऐसी योजना है, जिसे केंद्र सरकार ने 2024-25 से 2030-31 तक सात साल की अवधि के लिए मंजूरी दी है। इसका मुख्य लक्ष्य है खाद्य तिलहनों का उत्पादन बढ़ाना ताकि भारत खाद्य तेलों के आयात पर अपनी निर्भरता को कम कर सके। इस मिशन के लिए 10,103 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। यह योजना प्रमुख तिलहन फसलों जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल के उत्पादन को बढ़ाने पर केंद्रित है। साथ ही, यह गौण स्रोतों जैसे कपास के बीज, चावल की भूसी और वृक्ष-जन्य तेलों से तेल निकालने की दक्षता को भी बेहतर बनाएगी।इस मिशन का लक्ष्य है 2022-23 में 39 मिलियन टन तिलहन उत्पादन को 2030-31 तक 69.7 मिलियन टन तक बढ़ाना, जिससे देश की खाद्य तेल की जरूरत का लगभग 72% हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा हो सके। यह योजना राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन – ऑयल पाम (NMEO-OP) के साथ मिलकर काम करती है, जो विशेष रूप से ताड़ के तेल (पाम ऑयल) के उत्पादन पर केंद्रित है।

“NMEO-Oilseeds भारत को खाद्य तेलों में आत्मनिर्भर बनाने और हमारे मेहनती किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।” – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

NMEO-Oilseeds क्यों शुरू की गई?

भारत दुनिया में खाद्य तेलों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, लेकिन हमारी जरूरत का 57% हिस्सा आयात से पूरा होता है। 2022-23 में भारत ने 16.5 मिलियन टन खाद्य तेल आयात किया, जिसमें पाम ऑयल (इंडोनेशिया और मलेशिया), सोयाबीन तेल (ब्राजील और अर्जेंटीना), और सूरजमुखी तेल (रूस और यूक्रेन) शामिल हैं। यह आयात न केवल विदेशी मुद्रा पर बोझ डालता है, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। NMEO-Oilseeds इन समस्याओं को हल करने के लिए शुरू की गई है। इसके प्रमुख उद्देश्य हैं:

  • आयात निर्भरता कम करना: खाद्य तेलों के आयात को 57% से घटाकर 30-40% करना।
  • किसानों की आय बढ़ाना: न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और अन्य सहायता के जरिए किसानों को लाभकारी मूल्य देना।
  • टिकाऊ खेती को बढ़ावा: कम पानी और बेहतर मिट्टी प्रबंधन के साथ पर्यावरण-अनुकूल खेती।
  • उपज बढ़ाना: उच्च गुणवत्ता वाले बीजों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग।

NMEO-Oilseeds के प्रमुख लाभ

यह योजना किसानों, उपभोक्ताओं और पर्यावरण के लिए कई तरह से फायदेमंद है। आइए, इसके कुछ मुख्य लाभों पर नजर डालें:

  • उच्च उपज वाले बीज: किसानों को उच्च तेल सामग्री वाले बीज उपलब्ध कराए जाएंगे।
  • विस्तारित खेती: चावल और आलू की परती जमीनों पर तिलहन की खेती को बढ़ावा देना।
  • बेहतर बुनियादी ढांचा: बीज केंद्र, भंडारण इकाइयां और मूल्य श्रृंखला क्लस्टर विकसित करना।
  • आर्थिक सहायता: प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (PM-AASHA) के तहत MSP और मूल्य कमी भुगतान योजना।
  • पर्यावरणीय लाभ: कम पानी की खपत और मिट्टी की सेहत में सुधार।

NMEO-Oilseeds कैसे काम करती है?

NMEO-Oilseeds एक स्मार्ट और समन्वित दृष्टिकोण के साथ काम करती है। यह योजना कई स्तरों पर लागू की जा रही है:

  1. प्रमुख तिलहन फसलों पर फोकस: सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल की खेती को बढ़ावा।
  2. गौण स्रोतों का उपयोग: कपास के बीज, चावल की भूसी और वृक्ष-जन्य तेलों से तेल निकालने की दक्षता बढ़ाना।
  3. विस्तारित खेती: 40 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन पर तिलहन की खेती, जिसमें परती जमीनों, अंतर-फसलीकरण और फसल विविधीकरण शामिल है।
  4. SATHI पोर्टल: सीड ऑथेंटिकेशन, ट्रेसेबिलिटी और होलिस्टिक इन्वेंट्री (SATHI) पोर्टल के जरिए पांच साल की बीज योजना को लागू करना।
  5. मूल्य श्रृंखला क्लस्टर: 347 जिलों में मूल्य श्रृंखला क्लस्टर बनाकर किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज, प्रशिक्षण और मौसम/कीट प्रबंधन की सलाह देना।

NMEO-Oilseeds के तहत शामिल प्रमुख तिलहन फसलें

फसलमुख्य उत्पादक राज्यलाभ
सरसों (Rapeseed-Mustard)राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणाउच्च तेल सामग्री, ठंडे मौसम में खेती
मूंगफली (Groundnut)गुजरात, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडुबहुमुखी उपयोग, रबी और खरीफ दोनों में खेती
सोयाबीन (Soybean)मध्य प्रदेश, महाराष्ट्रप्रोटीन और तेल का अच्छा स्रोत
सूरजमुखी (Sunflower)कर्नाटक, महाराष्ट्रकम पानी की जरूरत
तिल (Sesamum)गुजरात, पश्चिम बंगालसूखा प्रतिरोधी, उच्च तेल सामग्री

कौन उठा सकता है इस मिशन का लाभ?

NMEO-Oilseeds का लाभ उन किसानों को मिलेगा जो:

  • तिलहन फसलों की खेती करते हैं, जैसे सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी और तिल।
  • चावल या आलू की परती जमीनों पर खेती करना चाहते हैं।
  • 347 चयनित जिलों में रहते हैं, जहां मूल्य श्रृंखला क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं।
  • कृषि सहकारी समितियों, FPOs या तेल प्रसंस्करण उद्योगों से जुड़े हैं।

टिप: अगर आप इस मिशन का लाभ लेना चाहते हैं, तो अपने जिले के कृषि विभाग या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) से संपर्क करें। आप NMEO की आधिकारिक वेबसाइट पर भी जानकारी ले सकते हैं।

कैसे करें आवेदन?

NMEO-Oilseeds के तहत लाभ लेने के लिए आपको कुछ आसान कदम उठाने होंगे:

  1. पंजीकरण: अपने नजदीकी कृषि कार्यालय या CSC में रजिस्ट्रेशन करवाएं।
  2. दस्तावेज: आधार कार्ड, जमीन के कागजात और बैंक खाता विवरण तैयार रखें।
  3. SATHI पोर्टल: बीज और अन्य संसाधनों के लिए SATHI पोर्टल पर पंजीकरण करें।
  4. स्थानीय सहायता: अपने जिले के कृषि अधिकारी या FPO से संपर्क करें।

आधिकारिक अधिसूचना देखें: ताजा जानकारी और दिशानिर्देशों के लिए NMEO की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।

FAQs:

1. NMEO-Oilseeds क्या है?

NMEO-Oilseeds एक सरकारी योजना है, जो 2024-25 से 2030-31 तक तिलहन उत्पादन बढ़ाने और खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए शुरू की गई है।

2. इस मिशन का लाभ कौन ले सकता है?

तिलहन फसलों की खेती करने वाले किसान, विशेष रूप से 347 चयनित जिलों में, और FPOs या सहकारी समितियों से जुड़े लोग इस मिशन का लाभ ले सकते हैं।

3. NMEO-Oilseeds के लिए कैसे आवेदन करें?

आप अपने नजदीकी कृषि कार्यालय, CSC या SATHI पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं। आधार कार्ड और जमीन के कागजात जरूरी हैं।

4. इस मिशन का मुख्य लक्ष्य क्या है?

यह मिशन 2030-31 तक तिलहन उत्पादन को 69.7 मिलियन टन तक बढ़ाने और आयात पर निर्भरता को 57% से कम करके 30-40% करने का लक्ष्य रखता है।

5. ताजा जानकारी कहां मिलेगी?

ताजा जानकारी के लिए NMEO की आधिकारिक वेबसाइट या अपने जिले के कृषि अधिकारी से संपर्क करें।

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