कहते हैं कि जब एक महिला आगे बढ़ती है, तो पूरा परिवार, पूरा समुदाय और पूरा समाज आगे बढ़ता है। असम सरकार ने इसी सोच को साकार करते हुए एक ऐसी योजना की शुरुआत की है जो सीधे तौर पर महिला सशक्तिकरण और आर्थिक स्वावलंबन को बढ़ावा दे रही है। लाखपति बाइडेओ योजना (Lakhpati Baideo Scheme) नाम की यह पहल राज्य की महिला स्वयं सहायता समूहों (Self-Help Groups – SHGs) को न सिर्फ आर्थिक मदद दे रही है, बल्कि उन्हें ‘माइक्रो-एंटरप्रेन्योर’ यानी सूक्ष्म उद्यमी बनने का रास्ता भी दिखा रही है। यह योजना उन महिलाओं के लिए एक वरदान है, जिनके पास हुनर है, जज्बा है और कुछ कर दिखाने का हौसला है, बस जरूरत है तो थोड़े से आर्थिक सहारे की। आइए, विस्तार से जानते हैं कि कैसे यह योजना असम की ‘बाइडेओs’ (बहनों) को ‘लाखपति’ बनने का सपना देखना सिखा रही है।
लाखपति बाइडेओ योजना क्या है? (What is the Lakhpati Baideo Scheme?)
लाखपति बाइडेओ योजना असम सरकार की एक प्रगतिशील और महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य की महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के सदस्यों को आर्थिक रूप से स्वतंत्र और सशक्त बनाना है। इस योजना के तहत, पात्र महिला समूहों को ₹35,000 की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि पूरी तरह से मुफ्त नहीं है, बल्कि इसे अनुदान (Grant) और ऋण (Loan) के मिश्रण के रूप में तैयार किया गया है, जिससे महिलाओं में वित्तीय अनुशासन और उद्यमशीलता की भावना विकसित हो।
योजना का अंतिम लक्ष्य यह है कि प्रत्येक लाभार्थी महिला की वार्षिक आय कम से कम ₹1,00,000 (1 लाख रुपये) हो, यानी वह एक ‘लाखपति’ बने। इसीलिए इस योजना का नाम ‘लाखपति बाइडेओ’ रखा गया है।
वित्तीय सहायता का स्वरूप: अनुदान और ऋण का सही मेल
योजना के तहत मिलने वाली ₹35,000 की राशि दो भागों में बाँटी गई है:
- अनुदान (Grant Component): कुल राशि का एक हिस्सा सरकार द्वारा सीधे अनुदान के रूप में दिया जाता है। यह एक तरह से बिना वापसी की राशि होती है, जिसका उपयोग महिलाएँ अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए कर सकती हैं।
- ऋण (Loan Component): बाकी का हिस्सा एक सहज शर्तों वाले ऋण (Subsidized Loan) के रूप में दिया जाता है। इस ऋण पर ब्याज की दर नाममात्र की होती है, जिसे आसानी से चुकाया जा सकता है।
सारणी: लाखपति बाइडेओ योजना – एक नजर में
| पहलू (Aspect) | विवरण (Details) |
|---|---|
| योजना का नाम | लाखपति बाइडेओ योजना |
| लक्षित समूह | महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) |
| वित्तीय सहायता | कुल राशि: ₹35,000 (अनुदान + ऋण) |
| मुख्य उद्देश्य | महिलाओं को सूक्ष्म उद्यमी बनाना और वार्षिक आय ₹1 लाख तक पहुँचाना |
| लाभ का प्रकार | वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, उद्यमिता विकास |
योजना के लिए पात्रता कौन रखता है? (Eligibility Criteria)
योजना का लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित शर्तों का पूरा होना आवश्यक है:
- लाभार्थी को असम का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- महिला किसी मान्यता प्राप्त स्वयं सहायता समूह (Self-Help Group – SHG) की सक्रिय सदस्य होनी चाहिए।
- समूह का रजिस्टर्ड और बैंक खाता होना अनिवार्य है।
- महिला के पास कोई व्यवसायिक योजना (Business Idea) होनी चाहिए, जैसे – बागवानी, मुर्गी पालन, हथकरघा, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई, छोटी दुकान आदि।
- आवेदक महिला की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
आवेदन कैसे करें? (Application Process)
आवेदन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी रखा गया है:
- SWG समूह में पंजीकरण: सबसे पहले, महिला का किसी मान्यता प्राप्त SWG में पंजीकृत होना जरूरी है।
- आवेदन पत्र प्राप्त करना: अपने समूह के माध्यम से या फिर जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (DRDA) / संबंधित ब्लॉक कार्यालय से आवेदन फॉर्म प्राप्त करें।
- व्यवसाय योजना तैयार करना: आवेदन के साथ एक छोटी और स्पष्ट व्यवसायिक योजना (Business Proposal) जमा करनी होगी, जिसमें बताना होगा कि वह राशि का उपयोग किस तरह के व्यवसाय में करेगी।
- दस्तावेज संलग्न करना: आवेदन फॉर्म के साथ जरूरी दस्तावेज जैसे आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, SWG का रजिस्ट्रेशन प्रमाण, बैंक खाता विवरण आदि attach करने होंगे।
- जमा करना और स्वीकृति: भरा हुआ आवेदन पत्र संबंधित अधिकारी को जमा कर दें। सत्यापन के बाद, योग्य आवेदकों को योजना के लिए चुन लिया जाएगा।
योजना का व्यापक प्रभाव: आर्थिक और सामाजिक क्रांति
लाखपति बाइडेओ योजना का प्रभाव सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सकारात्मक नतीजे पूरे समुदाय के लिए हैं।
- आर्थिक स्वावलंबन: महिलाएँ अपने छोटे व्यवसायों के जरिए अपने परिवार की आय बढ़ाने में सक्षम हो रही हैं, जिससे परिवार का जीवन-स्तर सुधर रहा है।
- रोजगार सृजन: जब एक महिला अपना उद्यम शुरू करती है, तो वह दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करती है, जैसे कि उसके परिवार के सदस्य या पड़ोसी।
- महिला सशक्तिकरण: आर्थिक रूप से स्वतंत्र होने से महिलाओं को परिवार और समाज में सम्मान और निर्णय लेने की शक्ति मिलती है।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती: यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे उद्योगों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है।
Conclusion: स्वावलंबन की वह कहानी, जो लिखी जा रही है असम की बहनों द्वारा
लाखपति बाइडेओ योजना सरकार की उस सोच का बेहतरीन उदाहरण है जो ‘दान’ देने के बजाय ‘अवसर’创造 करने पर विश्वास करती है। यह योजना महिलाओं को मछली देने का काम नहीं कर रही, बल्कि उन्हें मछली पकड़ना सिखा रही है। यह एक ऐसी क्रांति की शुरुआत है जहाँ असम की हर ‘बाइडेओ’ (बहन) न केवल अपने परिवार की, बल्कि पूरे राज्य की तरक्की में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह योजना सच्चे अर्थों में ‘आत्मनिर्भर असम’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की नींव मजबूत करने का काम कर रही है।
क्या आप या आपके आस-पास कोई महिला स्वयं सहायता समूह है जो इस योजना का लाभ उठाना चाहती है? तो आज ही अपने नजदीकी ग्राम पंचायत कार्यालय या जिला ग्रामीण विकास अधिकारी (DRDA) से संपर्क करें और इस योजना की पूरी जानकारी हासिल करें। अपने हुनर को पहचानें, एक छोटी सी योजना बनाएं और ‘लाखपति बाइडेओ’ बनने की दिशा में पहला कदम उठाएं!







